मेरा पहला ब्लॉग पोस्ट




 पिछले कुछ सालो से भारतीय राजनीति को समझने  और नज़दीक से देखने के बाद आज अचानक मेरे मन में एक विचार आया कि मुझे अपनी बात लोगो तक पंहुचाना चाहिए | सबसे आसान तरीका आज के दौर में इंटरनेट का जरिया लगा।

मेरा मानना है कि भारतीय राजनीती में पिछडो - दलितों एवं महिलाओ (पि द म , राजनीति ) को लेकर बहुत नारेबाजी हुयी है और इनके उत्थान के  लिए काम भी हुआ है लेकिन  प्रखर आवाज़ को पि द म राजनीती हमेशा से तरसती रही है क्योकि जो पि द म   की राजनीती करके सत्ता तक पहुंचे, उनको या तो सत्ता ने या फिर राजनीती ने अपना बना लिया  लेकिन ये लोग कभी राजनीति को अपना नहीं बना पाए और पिछड़ गए। सत्ता में पहुंचने पर भी वे पिछड़े या दलित ही रहे , राजनीति में तो पिछड़े- दलित रहे ही , मज़बूरी वश या लालच वश।

समय - समय पर इनकी आवाज़ को बुलंद किया गया है पर वैज्ञानिकता से , तीक्ष्णता से , स्पस्टता से  मुखर   होकर भारतीय  विचारधारा  के मूल विमर्श में  ये स्वर  टिक नहीं पाए।


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